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इंदौर की सैफी मस्जिद से PM मोदी ने दी बोहरा समाज की राष्ट्रभक्ति की मिसाल



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इंदौर में हज़रत इमाम हुसैन की शहादत के स्मरणोत्सव ‘अशरा मुबारका’कार्यक्रम में हिस्सा लिया. ये कार्यक्रम दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय के द्वारा आयोजित किया गया. प्रधानमंत्री के साथ बोहरा समुदाय के 53वें धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन भी मौजूद रहे. बोहरा समाज के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब किसी प्रवचन कार्यक्रम में कोई प्रधानमंत्री शामिल हो रहा है. शिवराज सरकार ने सैफुद्दीन को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है. सैफी मस्जिद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आप सभी के बीच में आना हमेशा मुझे प्रेरणा देता है, एक नया अनुभव देता है. अशरा मुबारक, के इस पवित्र अवसर पर आपने मुझे बुलाया इसलिए आपका आभारी हूं. उन्होंने कहा कि बोहरा समाज ने हमेशा से शांति का पैगाम रहा है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इमाम हुसैन अमन और इंसाफ के लिए शहीद हो गए.

उन्होंने कहा कि बोहरा समाज की भूमिका राष्ट्रभक्ति के प्रति सबसे अहम रही है. धर्मगुरु अपने प्रवचन के माध्यम से अपनी मिट्टी से मोहब्बत की बातें कहते हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि बोहरा समाज के साथ मेरा रिश्ता काफी पुराना है, मैं इस परिवार का सदस्य हूं. मेरे दरवाजे आपके लिए हमेशा खुले हैं.  उन्होंने कहा कि जन्मदिन से पहले ही मुझे इस पवित्र मंच से आशीर्वाद मिला है.

जानें कौन हैं बोहरा

दाऊदी बोहरा मुसलमानों की विरासत फातिमी इमामों से जुड़ी है जो पैगंबर मोहम्मद के प्रत्यक्ष वंशज हैं। 10वीं से 12वीं सदी के दौरान इस्लामी दुनिया के अधिकतर हिस्सों पर राज के दौरान ज्ञान, विज्ञान, कला, साहित्य और वास्तु में उन्होंने जो उपलब्धियां हासिल कीं आज मानव सभ्यता की पूंजी हैं। इनमें एक है काहिरा में विश्व के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक ‘अल-अजहर’। भारत में उनका सबसे बड़ा शाहकार है भेंडी बाजार स्थित रूदाते ताहेरा जो 51वें दाई अल-मुतलक सैयदना डॉ. ताहिर सैफुद्दीन और उनके पुत्र 52वें दाई अल-मुतलक सैयदना डॉ. मोहम्मद बुरहानु्द्दीन का मकबरा है। संगमरमर का बना यह मकबरा 10 से 12वीं सदी के दौरान मिस्र में प्रचलित फातिमीदी वास्तु और भारतीय कला का अद्भभुत मिश्रण है। रूदाते ताहेरा की शान बढ़ाती है बेशकीमती जवाहरातों से जड़ी सुनहरे हर्फों वाली अल-कुरान। मुंबई की 20 से ज्यादा बोहरा मस्जिदों में कई शानदार हैं जिनमें सबसे बड़ी है 100 वर्ष से भी ज्यादा पुरानी सैफी मस्जिद।