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मनमोहन सिंह बोले, विधायिका की ताकत संसदीय लोकतंत्र का अनुपम उदाहरण



पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि विधायिका की ताकत संसदीय लोकतंत्र का अनुपम उदाहरण है, हमें इसकी उपयोगिता को समझकर जनता की सेवा करनी चाहिए, विधायक अपनी जबावदेही निभाएं, विधानसभा के जरिए प्रदेश और देश की प्रगति में सहायक बने। प्रत्येक विधायक अपनी-अपनी विधानसभा के डवलपमेंट पर फोकस करें, नियमों और मर्यादाओं के तहत सदन में अपनी बात कहें, उसकी प्राथमिकता है कि जनहित, संवेदनशील विषयों को सदन के सामने लाए।

पूर्व प्रधानमंत्री एक दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। पंद्रहवीं विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों को संसदीय प्रक्रिया एवं कार्य व्यवहार की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए एक दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम रविवार को राजस्थान विधानसभा में आयोजित किया गया था। इसका उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने किया तथा समापन कार्यक्रमम के मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह थे।

पक्ष-विपक्ष एक दूसरे का सम्मान करें

मनमोहन ने कहा, पक्ष और विपक्ष का यह कर्तव्य है कि वे सदन में एक दूसरे का सम्मान करें, डेवलपमेंट के मुद्दों पर सामंजस्य रखें, 'जनता से सीधा संवाद रखें और उनसे जुड़े विषयों को सदन में उठाए, विधायक को सदन की कार्यवाही में नियमित रूप से भाग लेना चाहिए, नए विधायकों को सीनियर सदस्यों से सीखना चाहिए।

मनमोहन ने कहा कि मैं आज विधानसभा के सदस्यों से मिलकर बेहद खुश हूं। सभी सदस्य इस कार्यक्र में आए हैं। इससे विधानसभा की कार्यवाही में आपकी रुचि के बारे में पता चलता है। नियमों की जानकारी के हिसाब से ऐसी वर्कशॉप की आवश्यकता है। मैं यहां के विधायकों का आभार जताता हूं। मैं बहुत खुश हूं कि यहां प्रबोधन कार्यक्रम रखा गया। इस तरह की वर्कशॉप से राजस्थान के विकास को गति मिलेगी। विधायिका की ताकत संसदीय लोकतंत्र का अनुपम उदाहरण है।

गहलोत बोले, मनमोहन ने रखी उदारीकरण की नींव

वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मनमोहन सिंह का स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, 'मैं अपनी ओर से ,आप सबकी ओर से मनमोहन जी का स्वागत करता हूं। गहलोत ने कहा, मनमोहन सिंह के वित्त मंत्री बनने के बाद उदारीकरण की शुरुआत हुई, फिर देश के विकास के रास्ते खुले। वित्तमंत्री के रूप में कार्यकाल इतिहास के रूप में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। जीडीपी 9 प्रतिशत तक आ गई थी, पूरी दुनिया जब मंदी के दौर में थी, तब भारत उससे अछूता रहा तो केवल मनमोहन सिंह के कारण।

इस कार्यक्रम के बाद पक्ष-विपष नई शुरूआत करें

उन्होंने कहा, पहले अकाल पड़ते ही चेहरे मुरझा जाते थे, ये डॉ. मनमोहन सिंह का निर्णय था कि मनरेगा को लाया गया, उस समय यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी थीं। गहलोत ने कहा कि प्रबोधन की यह परम्परा काफी अच्छी है, नए उत्साह और सोच के साथ विधायक यहां से जाएंगे, इस कार्यक्रम के बाद पक्ष और विपक्ष नई शुरुआत करें, मैं यहां पधारने के लिए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का आभारी हूं। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने मनमोहन सिंह का स्वागत किया। उन्होंने कहा, मनमोहन सिंह का योगदान देश भूल नहीं सकता, विपक्ष की ओर से हम पूर्व प्रधानमंत्री का स्वागत करते हैं।

विधानसभा की नई वेबसाइट एवं मोबाइल एप्लीकेशन का लोकार्पण

इससे पहले प्रबोधन कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने विधानसभा की नई वेबसाइट एवं मोबाइल एप्लीकेशन का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, विधानसभा के अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी, नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया, संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल मौजूद रहे। ओम बिड़ला ने कहा, राजस्थान की विधानसभा का गौरवशाली इतिहास रहा है. समय समय पर इसने खुद को बदला और ढाला है।