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राहुल गांधी का इस्तीफा स्वीकार होते ही भंग हो जाएगी अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस



राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया है बावजूद इसके अभी भी कांग्रेस के नेता उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष ही बुलाते हैं. इसके पीछे तर्क देते है कि जब तक कांग्रेस वर्किग कमेटी इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं करती तब तक राहुल गांधी ही हमारे अध्यक्ष है. हालांकि जब राहुल गांधी ने कांग्रेस वर्किग कमेटी मे इस्तीफ़े की पेशकश की थी तो कांग्रेस की सबसे बड़ी कमेटी ने उन्हें पार्टी को दोबारा खड़ी करने के लिए अधिकृत कर दिया था.

कांग्रेस जल्द ही कांग्रेस वर्किग कमेटी की बैठक बुलाने वाली है जिसमें सबसे पहले राहुल गांधी के इस्तीफ़े को स्वीकार किया जाएगा और उसके बाद नए अध्यक्ष के नाम पर चर्चा होगी. लेकिन कांग्रेस के संविधान के हिसाब से जैसे ही राहुल गांधी का इस्तीफ़ा मंजूर होगा, उसी वक़्त पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव, सचिव , सेल के अध्यक्ष या यूं कहा जाए कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी भी उसी समय भंग हो जाएगी. यानि जो लोग राहुल गांधी के अध्यक्ष रहते पार्टी संगठन के पदों पर बैठे थे उनका भविष्य भी राहुल गांधी के इस्तीफ़े के साथ ही जुड़ा हुआ है. उसके बाद जब कांग्रेस नया अध्यक्ष चुनेगी तब फिर नए सिरे से राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन होगा.

कांग्रेस के सीनियर नेता के मुताबिक़ तो कांग्रेस वर्किग कमेटी भी भंग हो जानी चाहिए क्योंकि कांग्रेस कमेटी ने अपने सभी अधिकार पहले ही राहुल गांधी को दे दिए थे तो ऐसे मे कांग्रेस वर्किग कमेटी के रहने के क्या मायने हैं? लेकिन वर्किग कमेटी को भंग नहीं करते हैं तो अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तो राहुल के इस्तीफ़े के तुरंत बाद भंग हो जी जाएगी.

दिसंबर 2017 में राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था और 25 मई 2019 को राहुल ने लोकसभा चुनाव की हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़े की पेशकश कर दी थी. हालांकि राहुल के कांग्रेस अध्यक्ष रहते कांग्रेस ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने मे कामयाब रहे थे.